इंदौर,उज्जैन,देवास,शाजापुर,शुजालपुर,कालापीपल,अकोदिया के लिए भोपाल से प्रकाशित

Tuesday, 6 June 2017

कभी यहां भूख से तड़प रहे थे लोग, आज है ये दुनिया का सबसे अमीर देश

बुधनी टाईम्स

इंटरनेशनल डेस्क.सऊदी अरब, बहरीन, यूनाइटेड अरब एमिरेट्स (यूएई), यमन और मिस्र से डिप्लोमैटिक रिलेशन टूटने को लेकर कतर से चर्चा में है। कतर की गिनती उन देशों में की जाती है, जिन्होंने बहुत कम समय में बहुत ज्यादा तरक्की कर ली। 1970 तक ये देश करीब-करीब गुलाम बना रहा। इंटरनेशनल मोनेटरी 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, अब पर कैपिटा जीडीपी लिस्ट में कतर का नाम पहले नंबर पर आता है। देश की पर कैपिटा जीडीपी 82 लाख रुपए से ऊपर है। बिजनेस बंद होने से भुखमरी, बीमारियों ने घेरा...
कतर पर अल थानी परिवार ने 1900 के पहले से शासन किया है, तब ये ब्रिटेन के प्रोटेक्शन में हुआ करता था। 17 जुलाई 1913 को शेख अब्दुल्ला बिन कासिम अल थानी देश के शासक बने। इस देश को मछली और मोती के बिजनेस के लिए जाना जाता था। पर 1920 में मोतियों के बिजनेस में भारी गिरावट आई, जिसके बाद यहां गरीबी, भुखमरी और बीमारियां फैल गईं।
ऑयल मिलने से शुरू हुई तरक्की
1939 में दुखन में ऑयल की खोज हुई। हालांकि, सेकंड वर्ल्ड वॉर का दौर होने के चलते 1949 तक यहां बहुत धीमी रफ्तार से डेवलपमेंट हुआ। पर 1951 में कतर रोज 46500 बैरल ऑयल निकालने लगा। इसकी कीमत करीब 28 करोड़ रुपए थी। शैल कंपनी ने समुद्र के अलावा और जगहों पर भी ऑयल खोजा। इसके बाद कतर में रोज का ऑयल प्रोडक्शन 233000 बैरल होने लगा।